Wednesday, 9 January 2013

मन की बात .......आशा है आपके मन तक पहुचें

मन की बात .......आशा है आपके मन तक पहुचें
मैं हर्षा भरत शेमलानी एक कैंसर की मरीज हूँ ये सब तो आप जानते ही हैं फिर भी उन लोगो के लिए ये मैं बताना जरुरी समझती हु जो मुझे नहीं जानते ताकि मेरे मन की बात उनके मन तक पहुचे । सन 2009 में मुझे स्तन कैंसर हुआ था और फिर वो हड्डियों के आसपास फैल गया है { breast cancer recurrance in bone metastasis (The spreading of a disease (especially cancer) to another part of the body) पिछले 4 सालो से मेरी जिन्दगी में यही सब चल रहा है,मैं ये सब यहाँ इसलिए बता रही हूँ क्यूंकि मेरी बात का मुददा ही ये है।
आजकल मेरा डॉक्टरों के पास खूब आना जाना होता है । वहां जाकर ये महसूस होता है के मरीज को दवाई तो वो दे देते है खूब मोटी फीस लेकर पर उनके पास एक पैसे की भी सान्तवना नहीं है , समय नहीं हैं उस मरीज के लिए जो उनकी बातों का भूखा हैं, उनके दो शब्दों का प्यासा हैं, उनके विश्वास की सख्त जरुरत है जिसे , उस मरीज के प्रति कोई सहानुभति नहीं है, प्यार का तो नामो - निशान वहाँ के किसी बंदे में नहीं है, सच कहूँ तो आप उनके लिए इंसान ही नहीं हैं । आप उनके लिए पैसे कमाने की एक मशीन के अलावा कुछ भी नहीं हैं, डॉक्टर से ले कर निचले तपके तक ये परंपरा बरकार है । बड़ा दुख होता है जब इन सब बातों से हमारा सामना होता हैं , एक तो हम पहले से दुखी और उसपे ये सब बहोत ज्यादा हो जाता है । हर छोटी बात के लिए फीस ले ली जाती है , अन्दर की फीस अलग, बाहर की फीस अलग, उसकी फीस अलग , इसकी फीस अलग न जाने कितना बटोरते है, निचोड़े हुए को और कितना निचोड़ते है । शारीरिक दुख से ज्यादा मानसिक दुख इन सब बातों से होता है ।
कुछ डॉक्टर तो ऐसे है जिनकी उम्र इतनी बड़ी हो गयी है फिर भी वो भी यही सब करते है, हैरत की बात तो ये है की एक तरफ ये सब करते है और दूसरी तरफ अपना नाम रोशन के लिए संस्था चलाते है, है न हँसने वाली बात पर क्या करे यही सब चलता है । हक़ीकत वाकई बड़ी विचत्र होती है , कभी कभी तो हमारी कल्पना से भी परे ।
मैं ये चाहती हूँ की इनको कोई मानवता का केमो (chemotheraphy) दे ताकि इनके खून में बदलाव आये क्यूकी ये बदलाव बहोत जरुरी है, नहीं तो बहोत मुश्किल हो जाएगी । मरीज और ज्यादा बीमार हों जायेगा ......वो अपने साथ एक बीमारी ले जायेगा इनके पास और कुछ उसे फ्री ( like blood pressure, stress, diabetes etc ) में इन डॉक्टरों से मिल जाएगी ।

पर क्या करे हम ?


पर क्या करे हम ?

 

आज फिर कुछ लिखने को दिल करता है !

तुम्हे अपना कहने को दिल करता है !

जानते है हम की आप सुन-सुन कर थक गए

पर क्या करे हम ?

आज फिर वही दोहराने को दिल करता है !

तुम्हे अपना कहने को दिल करता है !

आज फिर वही भेल- पूरी खाने को दिल करता है

और तुम्हे भी खिलाने को  दिल करता है !

जानते है हम की यह बातें अच्छी नहीं है 

पर क्या करे हम ?

आज फिर वही दोहराने को दिल करता है !

तुम्हे अपना कहने को दिल करता है !

आज फिर मदमस्त हाथी-सा भटकने  दिल करता है

और तुम्हे भी संग भटकाने को  दिल करता है !

जानते है हम की यह ठीक नहीं  है 

पर क्या करे हम ?

आज फिर वही दोहराने को दिल करता है !

तुम्हे अपना कहने को दिल करता है !

आज फिर तुम्हारा इंतजार  करने को  दिल करता है

और तुम्हे सरे-राह ताकने को दिल करता है  !

जानते है हम की आप वक़्त के पाबंद नहीं  है 

पर क्या करे हम ?

आज फिर वही दोहराने को दिल करता है !

तुम्हे अपना कहने को दिल करता है !