Wednesday, 27 February 2013

कुछ तुम बदल गए…., कुछ हम बदल गए !


कुछ तुम बदल गए…., कुछ हम बदल गए !

 

उम्र के साथ जिंदगी के

मायने बदल गए !

कुछ तुम बदल गए

कुछ हम बदल गए !

 

रफ़्तार से चली जिंदगी

मोड़ पे कर रुक गई !

बिगड़ी हुई बात

बनते बनते रह गई !

कुछ तुम बदल गए

कुछ हम बदल गए !



हमने सुना था कमल में

कभी  कांटे नहीं होते !

पर दल-दल में पाव देखो

कुछ ऐसे धस गए !

कुछ तुम बदल गए

कुछ हम बदल गए !

 

संभल कर चले थे हम

सरे शाम तक मगर !

देहलीज़ पे के शब की

सारे अरमान मचल गए !

कुछ तुम बदल गए

कुछ हम बदल गए !