Saturday, 13 July 2013

जिंदगी


जिंदगी

 

जिंदगी तेरे हर रूप को निहारते जा रहे है

तू सुने ....या ना सुने.....................................!

हम पुकारते जा रहे है !

तेरी महफ़िल में बैठकर तेरी गुफ्तगू किए जा रहे है

तू सुने ....या ना सुने.....................................!

हम पुकारते जा रहे है !

तेरे कानो के नीचे  हलके से फुसफुसाते जा रहे है

तू सुने ....या ना सुने.....................................!

हम पुकारते जा रहे है !

जिंदगी तुझे जी भर के सवारते जा रहे है

तू सुने ....या ना सुने.....................................!

हम पुकारते जा रहे है !

ऐ जिंदगी तेरी हर साँस में खुद को उतारते जा रहे है

अब तो सुन भी ले ये जिंदगी ....................!

हम बड़ी सिद्दत से पुकारते जा रहे है !