इजहारे मोहब्बत
एक सपना होना चाहती हु ...,
तुम्हारे मन के आस -
पास
एक ख्वाहिश होना चाहती हु ..,
तुम्हारे तन के आस -
पास !
कुछ ओर पाने की ख्वाहिश
हमेशा मुझमे चलती हैं
वो शम्मा हु जो हर आलम में
बे- खौफ़ जलती हैं !
यू ही बैठें रहने से
कोई बात नहीं होती
आप आए या हम आए
वगरना मुलाकात नहीं होती !
वो लाख छुपाये पर प्यार कहाँ चुप
पायेगा
आँखों से उनकी बरबस ही बरस
जायेगा !
मेरी चाहत में असर होगा तो
तू खीचा चला आयेगा
चाहेगा दूर रहना फिर भी
कहाँ रह पायेगा !