Monday, 8 July 2013

इजहारे मोहब्बत


इजहारे मोहब्बत 



एक सपना होना चाहती हु ...,

तुम्हारे मन के आस - पास 

एक ख्वाहिश होना चाहती हु ..,

तुम्हारे तन के आस - पास !

 

कुछ ओर पाने की ख्वाहिश 

हमेशा मुझमे चलती हैं 

वो शम्मा हु जो हर आलम में 

बे- खौफ़ जलती हैं !

 

यू  ही बैठें  रहने से 

कोई बात नहीं होती 

आप आए या हम आए 

वगरना मुलाकात नहीं होती !

 

वो लाख छुपाये पर प्यार कहाँ चुप पायेगा 

आँखों से उनकी बरबस ही बरस जायेगा !

 

मेरी चाहत में असर होगा तो 

तू खीचा चला आयेगा 

चाहेगा दूर रहना फिर भी

कहाँ रह पायेगा ! 

 

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