Monday, 18 February 2013

कोशिश


कोशिश

 

 

कोशिश तो हमेशा यही रही हमारी,

जो हैं उस से कुछ बेहतर कर पाऊ !

नए जतन, नए यतन ,

ओर कुछ , ओर विश्वास डाल दूँ !

स्वयं  को नीर-सा एक रस घोल दूँ !

हर साँस यही कहती हैं ,

हर नज़र यही सोचती हैं ,

कुछ ओर नयापन चाहिए ,

कुछ ओर समर्पण चाहिए ,

मुझे कुछ ओर ...........................

यक़ीनन,

कुछ इस से भी बेहतर चाहियें !

 

कुछ इस से भी बेहतर चाहियें !