कोशिश
कोशिश तो हमेशा यही रही हमारी,
जो हैं उस से कुछ बेहतर कर पाऊ !
नए जतन, नए यतन ,
ओर कुछ , ओर विश्वास डाल दूँ !
स्वयं को नीर-सा एक रस घोल दूँ !
हर साँस यही कहती हैं ,
हर नज़र यही सोचती हैं ,
कुछ ओर नयापन चाहिए ,
कुछ ओर समर्पण चाहिए ,
मुझे कुछ ओर ...........................
यक़ीनन,
कुछ इस से भी बेहतर चाहियें !
कुछ इस से भी बेहतर चाहियें !