Thursday, 14 March 2013

अब तो बता ये जिंदगी , क्या दुश्मनी है !


 

        अब तो बता ये जिंदगी , क्या दुश्मनी है !

 

कही दूर बह गयी वो जिन्दगी मेरी

मैं पकडने तो दौडी, वो आगे निकल गयी

 

जिन्हें   ढूढ़ती रही निगाहे उम्र भर

वो फुल किसी और पाषाण पर मिले

यू जिंदगी ने हमसे मुह फेरा

जब भी मिली सौतन सी ही मिली

 

हर बार ललचा के, गुम हो गयी

उसकी तलाश में उम्र तमाम गुजर गयी

अब मौत के पहलु में बैठे है हम

अब तो बता ये जिंदगी , क्या दुश्मनी है !