Thursday, 10 January 2013

तेरे नाम ........मेरा आखरी पैगाम


तेरे नाम ........मेरा आखरी पैगाम

 

 

इस दर्द को अब कैसे मिटाया जाये ............?

आओ फिर इक दौर मोहब्बत का दोहराया जाये !

इससे अच्छा कोई इलाज़ हो ही नहीं सकता

आओ क़रीब की बात में यकीं लाया जाये !

साँस थमने को हैं, नब्ज़ मेरी रुकने को हैं

धडकनों को थोडा सा थाम के रखा है मैंने

ना कोई शिकायत है तुमसे और ना ये शरारत

आखरी साँस है मेरी , आखरी है इल्तजा

मेरे जख्मों को मरहम तुम ही लगा जाओ

अब तो जाओ , अब तो जाओ !

इस दर्द को अब कैसे मिटाया जाये ............?

आओ फिर इक दौर मोहब्बत का दोहराया जाये !

इससे अच्छा कोई इलाज़ हो ही नहीं सकता

आओ क़रीब की बात में यकीं लाया जाये !

 

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