Monday, 28 January 2013

ग़ज़ल .......तेरी मेरी उम्र मे


ग़ज़ल .......तेरी मेरी उम्र मे

 

तेरी मेरी उम्र मे अक्सर ये होता है

जुबा खमोश और दिल रोता है, है ना !

 

तेरे मेरे साथ अक्सर ये होता है

वक़्त खामोश और काम होता है, है ना !

 

तेरे मेरे बिच मे अक्सर ये होता है

तू कुछ कहे और कुछ ये दिल सुनता है, है ना !

 

तेरे मेरे आस-पास एक ख़ुमार सा रहता है

तू जिसमे झूमता है और नशा मुझको होता है, है ना !

 

तेरी मेरी उम्र मे अक्सर ये होता है

जुबा खमोश और दिल रोता है, है ना !

 

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