ग़ज़ल .......तेरी मेरी उम्र मे
तेरी मेरी उम्र मे अक्सर ये होता
है
जुबा खमोश और दिल रोता है, है ना !
तेरे मेरे साथ अक्सर ये होता है
वक़्त खामोश और काम होता है, है ना
!
तेरे मेरे बिच मे अक्सर ये होता है
तू कुछ कहे और कुछ ये दिल सुनता
है, है ना !
तेरे मेरे आस-पास एक ख़ुमार सा रहता
है
तू जिसमे झूमता है और नशा मुझको
होता है, है ना !
तेरी मेरी उम्र मे अक्सर ये होता
है
जुबा खमोश और दिल रोता है, है ना !
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