Wednesday, 9 January 2013

पर क्या करे हम ?


पर क्या करे हम ?

 

आज फिर कुछ लिखने को दिल करता है !

तुम्हे अपना कहने को दिल करता है !

जानते है हम की आप सुन-सुन कर थक गए

पर क्या करे हम ?

आज फिर वही दोहराने को दिल करता है !

तुम्हे अपना कहने को दिल करता है !

आज फिर वही भेल- पूरी खाने को दिल करता है

और तुम्हे भी खिलाने को  दिल करता है !

जानते है हम की यह बातें अच्छी नहीं है 

पर क्या करे हम ?

आज फिर वही दोहराने को दिल करता है !

तुम्हे अपना कहने को दिल करता है !

आज फिर मदमस्त हाथी-सा भटकने  दिल करता है

और तुम्हे भी संग भटकाने को  दिल करता है !

जानते है हम की यह ठीक नहीं  है 

पर क्या करे हम ?

आज फिर वही दोहराने को दिल करता है !

तुम्हे अपना कहने को दिल करता है !

आज फिर तुम्हारा इंतजार  करने को  दिल करता है

और तुम्हे सरे-राह ताकने को दिल करता है  !

जानते है हम की आप वक़्त के पाबंद नहीं  है 

पर क्या करे हम ?

आज फिर वही दोहराने को दिल करता है !

तुम्हे अपना कहने को दिल करता है !

 

1 comment: