Saturday, 2 February 2013

एक प्यार भरा नाता !


 

एक प्यार भरा नाता !

 

 

क्या अकसर ऐसा होता है

बड़े होते ही लोग सब-कुछ भूल जाते है

पुराना भूल जाते है

रिश्तें निभाना भी भूल जाते है

देखों ना ...............!

वो तो मुझे भूल गया ..........

हाँ वो मुझे भूल गया..............!

मेरा बड़ा अपना है वो ..........!

मेरी जिंदगी का पहला छोटा तोहफा है वो

मेरे प्यार, मेरी ममता का पहला हक़दार है

और मैंने जी खोल कर सब उसे दिया

खूब चाहा और खूब प्यार किया

अपने इन हाथों से न जाने कितना उसका दुलार किया

उसके नन्हें हाथों को न जाने कितना प्यार किया

उसकी हर हरकत पे जी निसार किया

                   और बड़े होते ही वो मुझे भूल गया............

                    हाँ वो मुझे भूल गया............!

क्या बड़ा होना याने

सिर्फ अपने भविष्य के बारे में सोचना भर ही है

अपने वर्तमान को तार - तार करना

सारे रिश्तों को जार-जार करना

क्या इसीको बड़ा होना कहते है

ना जाने ये कैसा बड़ा होना है ?

ना जाने ये कैसा जीना है ?

जिंदगी तो तभी है

जब सब साथ है

हम भी , तुम भी और आने वाला कल भी........!

फिर क्यूँ कर वो ये सब भूल गया

ऐसे तो बड़ा ही जहीन है वो

अपने आप में परिपूर्ण है वो

फिर क्यूँ कर ऐसा किया उसने ?

या की उस से हो गया ............

हाँ पर वो मुझे भूल गया !

दोष किसी ओर का नहीं उसीका है

वो मेरे प्यार को नज़र अंदाज़ कर गया

मेरी ममता पे पानी उंडेल गया

मेरी आँखों को आँसुओं से भर गया

                    हाँ वो मुझे भूल गया..............!

                    देखों ना ...............!

आज फिर उसकी याद आधी रात को आ गयी

मेरे सीने में नश्तर चुभा गयी

मेरे दिल को फिर रुला गयी

मेरे जहन पे उसकी नन्ही हँसी छा गयी

मुझे दुःख पंहुचा गयी उसकी बेरुखी

पर अब क्या फायदा

हुए पे गिला भी क्या

अब इन बातों का सिला भी क्या ?

हाँ दौड़कर आए वो

बरबस ही गले लग जाए वो

हमारे प्यार भरे नाते को

फिर से जगा जाये

पुराने ज़ख्मों पे मरहम लगा जाए वो

तो बस मज़ा आ जाये

तो बस मज़ा आ जाये !

नहीं तो, हाँ वो मुझे भूल गया............!

 

 

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