शाम और
तुम
कितनी सुन्दर
लग रही हो
तुम
उस पत्थर
पर बैठी
क्या अंदाज़ से
बात कर रही
हो
वाह क्या
कहने !
बिलकुल स्वछंद
रूप से
अपने पड़ोसियों
से बात करती
हुई
तुम वाकई
बड़ी प्यारी लग
रही हो
जिस ढंग
से तुम प्रकृति
को निहार रही
हो
सच कहते
है हम !
प्रकृति भी
धन्य हो गयी
शाम की
कीमत बढ़ा रही
हो तुम
तुम और
तुम्हारी स्वछंदता
इस शाम
को और मधुर
बना रहे है
बड़ी प्यारी
लग रही हो
तुम
जिस अंदाज़
से उस पत्थर
पर बैठी हो
तुम
तुम्हरी हँसी
सारे माहोल में
गूंज रही है
और तुम्हारी
आवाज़ यहाँ तक
आ रही है
तुम्हारा लिबास
बिलकुल तुम जैसा
दुरुस्त है
सारा माहोल
तुम उठा रही
हो
बड़ी प्यारी
लग रही हो
तुम
जिस अंदाज़
से उस पत्थर
पर बैठी हो
तुम
No comments:
Post a Comment