Friday, 8 March 2013

हम ना चाहे फिर भी अचानक ही.......................


हम ना चाहे फिर भी अचानक ही.......................

 

कभी कभी अनचाहे ही बड़ी अजीब सी बात हो जाती है

हम ना चाहे फिर भी अचानक ही , गम से मुलाकात हो जाती है

बड़ा मुश्किल हो जाता है , उस से हँस कर मिलना

समझ से बाहर जो जाता है, वो पल , वो समय

बड़े भयभीत हो जाते है हम, थोड़े विचरित हो जाते है हम

दुसरो की क्या खबर रखे, ख़ुद की सुध नहीं रख पाते है हम

यू लगता है की  ये क्या ? जिंदगी में तो पूर्ण विराम लग गया

अब आगे हम कैसे बड़े ?, सोच की धज्जिया उड़ जाती है

खोपड़े में दिमाग भी होता है, हम ये भूल ही जाते है

तो उस दिमाग का इस्तेमाल करना कहा याद रहता है

कभी कभी अनचाहे ही बड़ी अजीब सी बात हो जाती है

हम ना चाहे फिर भी अचानक ही , गम से मुलाकात हो जाती है !

 

 

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