Thursday, 17 January 2013

गज़ल - क्यूँ न आज फिर


गज़ल - क्यूँ न आज फिर

 

 

क्यूँ न आज फिर आपसे बात की जाए .........!

शिकायतों के बिन नयी सुरुवात की जाए .........!

 

मुस्कुरातें थे लब ये मेरे तेरे लबों को देखकर

गुनगुनाते थे लब ये मेरे तेरे लबों को देखकर

आज फिर इन लबों को ये सौगात दी जाए !

क्यूँ न आज फिर आपसे बात की जाए .........!

 

आप भी आप थे ........................हम भी थे हम

ओर खो गया ....था सारा.............. अपनापन

आज फिर उस परायेपन को मात दी जाए !

क्यूँ न आज फिर आपसे बात की जाए .........!

 

क्यूँ न आज फिर आपसे बात की जाए .........!

शिकायतों के बिन नयी सुरुवात की जाए .........!

 

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