Tuesday, 12 February 2013

छंद आलसियों के नाम


छंद आलसियों के नाम

             राई का पहाड़ बनाना कोई इनसे सीखे !

बेबात की बात  बनाना कोई इनसे सीखे !

 

वक़्त का दुरुपयोग करना कोई इनसे सीखे !
और उसपे उपदेश झाड़ना कोई इनसे सीखे !

 

अज्ञानता की अनूठी बातें कोई इनसे सीखे !
धर्म की धज्जिया उडाना कोई इनसे सीखे !

 

आलस और आराम इनके परम मित्र है !

दुसरो की खिल्ली उड़ाना  कोई इनसे सीखे  !

 

देखो तुम ना कही ये सब सिख लेना  !

हा  इनसे दूर रहना ये तुम सीख लेना !

Monday, 11 February 2013

अपनी तारीफ


अपनी तारीफ

 

 

"  जिंदगी जीने के ....... ,

नए आयाम समेट लाते है,

हम हर कोने से जा-जा कर,

नए नाम  समेट लाते है "

 

" उनसे कहते है अपने दिल की,

उनसे सुनते  है अपने दिल की,

वो चाहे सुने ना सुने............,

हम तो करते है अपने दिल की "

 

" जिद से ज्यादा,

जिद्दी है हम,

ओर क्या कहे कितने,

फिसद्दी है हम "

 

Saturday, 9 February 2013

शाम और तुम


शाम और तुम

 

कितनी सुन्दर लग रही हो तुम

उस पत्थर पर बैठी

क्या अंदाज़ से बात कर रही हो

वाह क्या कहने !

बिलकुल स्वछंद  रूप से

अपने पड़ोसियों से बात करती हुई

तुम वाकई बड़ी प्यारी लग रही हो

जिस ढंग से तुम प्रकृति को निहार रही हो

सच कहते है हम !

प्रकृति भी धन्य हो गयी

शाम की कीमत बढ़ा रही हो तुम

तुम और तुम्हारी स्वछंदता

इस शाम को और मधुर बना रहे है

बड़ी प्यारी लग रही हो तुम

जिस अंदाज़ से उस पत्थर पर बैठी हो तुम

तुम्हरी हँसी सारे माहोल में गूंज रही है

और तुम्हारी आवाज़ यहाँ तक रही है

तुम्हारा लिबास बिलकुल तुम जैसा दुरुस्त है

सारा माहोल तुम उठा रही हो

बड़ी प्यारी लग रही हो तुम

जिस अंदाज़ से उस पत्थर पर बैठी हो तुम

 

 

Thursday, 7 February 2013

जाने क्यू ........


जाने क्यू ........

 

 

जाने क्यू वो डर गए,,,,,,,,,,,,,,,,?

अपने प्यार से, अपनी दोस्ती से मुकर गए !

जाने क्यू वो अपने घर गए.......?

अपने वादे से, अपनी मुलाकात से मुकर गए !

जाने क्यू वो सहम गए,,,,,,,,,,,,,,,,?

अपने इरादे से, हर एक वादे से मुकर गए !

फिर भी जाने क्यू हम उन पे मर गए,,,,,,,,,,,,,,,,?

ओर ना जाने किस तरह, वो हमारे दिल में उतर गए !

 

Saturday, 2 February 2013

एक प्यार भरा नाता !


 

एक प्यार भरा नाता !

 

 

क्या अकसर ऐसा होता है

बड़े होते ही लोग सब-कुछ भूल जाते है

पुराना भूल जाते है

रिश्तें निभाना भी भूल जाते है

देखों ना ...............!

वो तो मुझे भूल गया ..........

हाँ वो मुझे भूल गया..............!

मेरा बड़ा अपना है वो ..........!

मेरी जिंदगी का पहला छोटा तोहफा है वो

मेरे प्यार, मेरी ममता का पहला हक़दार है

और मैंने जी खोल कर सब उसे दिया

खूब चाहा और खूब प्यार किया

अपने इन हाथों से न जाने कितना उसका दुलार किया

उसके नन्हें हाथों को न जाने कितना प्यार किया

उसकी हर हरकत पे जी निसार किया

                   और बड़े होते ही वो मुझे भूल गया............

                    हाँ वो मुझे भूल गया............!

क्या बड़ा होना याने

सिर्फ अपने भविष्य के बारे में सोचना भर ही है

अपने वर्तमान को तार - तार करना

सारे रिश्तों को जार-जार करना

क्या इसीको बड़ा होना कहते है

ना जाने ये कैसा बड़ा होना है ?

ना जाने ये कैसा जीना है ?

जिंदगी तो तभी है

जब सब साथ है

हम भी , तुम भी और आने वाला कल भी........!

फिर क्यूँ कर वो ये सब भूल गया

ऐसे तो बड़ा ही जहीन है वो

अपने आप में परिपूर्ण है वो

फिर क्यूँ कर ऐसा किया उसने ?

या की उस से हो गया ............

हाँ पर वो मुझे भूल गया !

दोष किसी ओर का नहीं उसीका है

वो मेरे प्यार को नज़र अंदाज़ कर गया

मेरी ममता पे पानी उंडेल गया

मेरी आँखों को आँसुओं से भर गया

                    हाँ वो मुझे भूल गया..............!

                    देखों ना ...............!

आज फिर उसकी याद आधी रात को आ गयी

मेरे सीने में नश्तर चुभा गयी

मेरे दिल को फिर रुला गयी

मेरे जहन पे उसकी नन्ही हँसी छा गयी

मुझे दुःख पंहुचा गयी उसकी बेरुखी

पर अब क्या फायदा

हुए पे गिला भी क्या

अब इन बातों का सिला भी क्या ?

हाँ दौड़कर आए वो

बरबस ही गले लग जाए वो

हमारे प्यार भरे नाते को

फिर से जगा जाये

पुराने ज़ख्मों पे मरहम लगा जाए वो

तो बस मज़ा आ जाये

तो बस मज़ा आ जाये !

नहीं तो, हाँ वो मुझे भूल गया............!

 

 

Tuesday, 29 January 2013

मौत ............!


मौत ............!

कह दो मौत से न इधर आये..............

अभी मैं थोड़ी व्यस्त हु !

अभी तो मैंने अपने गहने भी नहीं संजोये

अभी तो मैंने अपने कपडे भी नहीं समेटे

किचन भी मेरा अस्त-वस्त पड़ा है

घर भी अब तक संगवाया नहीं गया है

और मेरे प्यारे रिश्तों को तो फीता तक नहीं लगाया

अभी तो मैंने अपने समिपों से संवाद तक नहीं साधा है

जब तक मैं अपने अपनों का सारा काम न समाप्त करू

उन सबको मैं उनकी जिमेदारियां ना सौप दू

तब तक मैं यहाँ से जा नहीं सकती

यह तो किसी हाल मुमकिन ही नहीं है

सो ...... कह दो मौत से न इधर आये..............

अभी मैं थोड़ी व्यस्त हु !
 

Monday, 28 January 2013

ग़ज़ल .......तेरी मेरी उम्र मे


ग़ज़ल .......तेरी मेरी उम्र मे

 

तेरी मेरी उम्र मे अक्सर ये होता है

जुबा खमोश और दिल रोता है, है ना !

 

तेरे मेरे साथ अक्सर ये होता है

वक़्त खामोश और काम होता है, है ना !

 

तेरे मेरे बिच मे अक्सर ये होता है

तू कुछ कहे और कुछ ये दिल सुनता है, है ना !

 

तेरे मेरे आस-पास एक ख़ुमार सा रहता है

तू जिसमे झूमता है और नशा मुझको होता है, है ना !

 

तेरी मेरी उम्र मे अक्सर ये होता है

जुबा खमोश और दिल रोता है, है ना !